शिवपुराण एवं अनेकों ग्रंथों में शिव पूजा करते समय बिल्वपत्र की महिमा का बखान किया गया है-
अखण्ड-बिल्वपत्रों द्वारा एक बार भी जो पुरुष भगवान सदाशिव का पूजन करता है वह पुण्यात्मा समस्त पापों से छूटकर शिव के परमधाम को प्राप्त करता है।
जो पुरुष पंचाक्षर मन्त्रोच्चारण पूर्व (नम: शिवाय) आशुतोष सदाशिव का श्रद्धापूर्वक बिल्वपत्रों द्वारा पूजन करता है, वह इस लोक में ऐश्वर्यवान् होकर अन्त में शिवधाम को जाता है। हे नारद! बिल्ववृक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा वन्दना मात्र से भी दिन-रात किये हुए समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
हे देवर्षि नारद! जो पुरुष सूखे, एक या दो दिन पूर्व के रखे बिल्वपत्रों से उमापति का पूजन करता है वह सभी पापों से छूट जाता है।
बिल्ववृक्ष का आश्रय लेकर जो पुरुष विधिवत् मन्त्र का जप करता है, वह पुण्यात्मा पुरुष पुरश्चरण का फल प्राप्त करता है।
बिल्वपत्रों द्वारा शिवजी का पूजन सर्वकामनाओं का प्रदाता तथा सम्पूर्ण दरिद्रों का विनाशक है, बिल्वपत्र से बढ़कर महादेव को प्रसन्न करने वाली अन्य कोई वस्तु नहीं। भगवन् भोलेनाथ को आक-धतुरा बिल्वपत्र आदि अति प्रिय हैं अत: आप भक्तजन यही उन्हें अर्पित करें।
बिल्वपत्र सदैव उल्टा अर्पित करें अर्थात् पत्तें का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहे।
महादेव को बिल्वपत्र अर्पित करते समय निम् मंत्र का उच्चारण करें-
अखण्ड-बिल्वपत्रों द्वारा एक बार भी जो पुरुष भगवान सदाशिव का पूजन करता है वह पुण्यात्मा समस्त पापों से छूटकर शिव के परमधाम को प्राप्त करता है।
जो पुरुष पंचाक्षर मन्त्रोच्चारण पूर्व (नम: शिवाय) आशुतोष सदाशिव का श्रद्धापूर्वक बिल्वपत्रों द्वारा पूजन करता है, वह इस लोक में ऐश्वर्यवान् होकर अन्त में शिवधाम को जाता है। हे नारद! बिल्ववृक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा वन्दना मात्र से भी दिन-रात किये हुए समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
हे देवर्षि नारद! जो पुरुष सूखे, एक या दो दिन पूर्व के रखे बिल्वपत्रों से उमापति का पूजन करता है वह सभी पापों से छूट जाता है।
बिल्ववृक्ष का आश्रय लेकर जो पुरुष विधिवत् मन्त्र का जप करता है, वह पुण्यात्मा पुरुष पुरश्चरण का फल प्राप्त करता है।
बिल्वपत्रों द्वारा शिवजी का पूजन सर्वकामनाओं का प्रदाता तथा सम्पूर्ण दरिद्रों का विनाशक है, बिल्वपत्र से बढ़कर महादेव को प्रसन्न करने वाली अन्य कोई वस्तु नहीं। भगवन् भोलेनाथ को आक-धतुरा बिल्वपत्र आदि अति प्रिय हैं अत: आप भक्तजन यही उन्हें अर्पित करें।
बिल्वपत्र सदैव उल्टा अर्पित करें अर्थात् पत्तें का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहे।
महादेव को बिल्वपत्र अर्पित करते समय निम् मंत्र का उच्चारण करें-
त्रीदलं त्रिगुणाकारं त्रिनैत्रं च त्रिधायुतम्।
त्रीजन्म पापसंहारं एक बिल्व शिवापृणम॥





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